फेका था उसने संग,गुलोमे लपेट के.

दुनियाको कुछः खबर नही, क्या हादसा हुआ,
फेका था उसने संग,गुलोमे लपेट के.
 
फिर सून रहा हु,गुजरे जमाने कि आपको,
भुला हुआ था, देर से अपने आपको.
 
क्या कहु दिदारे तर यह तो मेरा चहेरा है,
संग कटजाते है,बारीस कि जहा धार गिरे.
 
रस्ता भी वापसी का कही बनमे खो गया,
ओजल हुई निगाह से,हिरणो कि डाल भी.
 
न इतनी तेज चले सर फिरी हवासे कहो,
शजर(पेड) पे एक हि पत्ता दिखाई देता है.
 
बेनाम आरजू ओ कि तकमिल के लिये,
जजबात कि नदी में बहाया गया मुजे,
 
हर आरजू को जब्र्र कि सांच मे ढालकर,
कीस कीस तऱ्ह बनाके मिटाया गया मुजे.

Author: rajnissh

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